Resolution Ias By Er Neelesh Tomar
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संसदीय समितियां क्या है तथा कितने प्रकार की होती है
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संसद अपने कार्यो को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए संसदीय समितियों का गठन करती है। समितियां दो प्रकार की होती है।
- स्थायी समिति
- अस्थायी समिति
संसद की तीन स्थायी वित्तीय समितियां है
- लोखलेखा समिति
- अनुमान समिति
- लोक उपक्रम समिति
लोखलेखा समिति - इस समिति में कुल 22 सदस्य होते है जिसमे 15 लोकसभा तथा 7 राज्य सभा से इनके सदस्यों का चुनाव प्रतिवर्ष होता है। इसका अध्यक्ष सदैव विपक्ष का सदस्य ही हो सकता है इसके अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष करता है इस समिति का मुख्य कार्य CAG की रिपोर्ट को आधार बनाकर सरकार के आय एवं व्यय की जाँच करना CAG को इस समिति का मित्र और मार्ग दर्शक कहा जाता है। इस समिति में कोई मंत्री सदस्य नहीं हो सकता
अनुमान समिति - इस समिति में कुल 30 सदस्य होते है और सभी सदस्य लोकसभा से होते है इस समिति का कार्य सरकार के द्वारा प्रस्तुत किये गए बजटीय अनुमान संबंधित प्रक्रिया की जाँच करती है। और उसमे मितव्यता (किफायत) लाने के संबंध में सुझाव देती है। इसका अध्यक्ष कोई भी पक्ष या विपक्ष का हो सकता है।
लोक उपक्रम समिति - इस समिति में भी 22 सदस्य होते है। जिसमे 15 सदस्य लोकसभा से तथा 7 सदस्य राज्य सभा से होते है इस समिति का मुख्य कार्य लोक उपक्रम (सरकारी कंपनियों) की आय और व्यय की जाँच करती है और उससे संबंधित रिपोर्ट संसद को देती है। इस समिति की स्थापना 1964 में कृष्ण मैनन की सिफारिश से की गयी थी।
Note - उपरोक्त में से किसी समिति में कोई मंत्री सदस्य नहीं बन सकता है।
विभाग संबंधित स्थायी समितियां - संसद के द्वारा 1993 में सर्वप्रथम 17 विभाग संबंधित स्थायी समितियों का गठन किया गया था। वर्तमान में इनकी संख्या 24 है। यह समितियां बजट में प्रस्तुत की गयी विभिन्न अनुदानों की माँगो की जाँच करती है। और इससे संबंधित रिपोर्ट संसद को देती है इसके बाद ही संसद में बजट पर मतदान होता है।


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