लोकसभा अध्यक्ष

 Resolution Ias By Er Neelesh Tomar

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लोकसभा अध्यक्ष 

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लोकसभा अध्यक्ष को लोकसभा के सदस्यों के द्वारा चुना जाता है। अध्यक्ष लोकसभा के अध्यक्ष के रूप में शपथ नहीं लेता है। वह लोकसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेता है। अध्यक्ष को लोकसभा द्वारा पारित प्रस्ताव के आधार पर हटाया जा सकता है। अध्यक्ष किसी भी विधयक  धन विधयक के रूप में प्रमाणित करता है। अध्यक्ष ही दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करता है। अध्यक्ष किसी विधयक पर मतदान की स्थिति में पहले बोट दे सकता है किन्तु मत बराबर होने की स्थिति में निर्णायक मत नहीं दे सकता है। यदि अध्यक्ष को हटाने से संबंधित प्रस्ताव लाया जाता है तो उस समय वह बैठक की अध्यक्षता नहीं करता है। ऐसी स्थिति में वह आरंभ में मत दे सकता है किन्तु मत बराबर होने की स्थिति में निर्णयायक मत नहीं दे सकता है। अध्यक्ष के न रहने पर उपाध्यक्ष काम करता है यदि दोनों अनुपस्थित रहते है तो लोकसभा के सदस्यों में से बनाये गए एक पैनल का कोई सदस्य बैठक की अध्यक्षता करता है। अध्यक्ष अपना इस्तीफा उपाध्यक्ष को और उपाध्यक्ष अपना इस्तीफा अध्यक्ष को देता है। 

प्रोटेन स्पीकर - यह लोकसभा का अस्थायी अध्यक्ष होता है। नई लोकसभा के गठन के बाद राष्ट्रपति किसी एक बरिष्ठ सदस्य को प्रोटेन अध्यक्ष नियुक्त करते है। और इसे शपथ दिलाते है और यह अध्यक्ष लोकसभा के पहली बैठक की अध्यक्षता करता है और सभी सदस्यों को शपथ दिलाता है। तथा इसी बैठक में लोकसभा में स्थायी अध्यक्ष का चुनाव हो जाने के बाद यह प्रोटेन अध्यक्ष अपने पद से हट जाता है। 

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