Resolution Ias By Er Neelesh Tomar
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राष्ट्रपति का अध्यादेश एवं वीटो पावर
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अनु० 123- उस समय को छोड़ कर जिस समय संसद के दोनों सदन सत्र में हो बाकी किसी भी समय राष्ट्रपति अध्यादेश के माध्यम से कोई कानून बना सकता है इस अध्यादेश की शक्ति संसद के कानून के बराबर होती है इसकी वैधता 6 माह तक होती है 6 माह के बाद संसद के द्वारा इसे पारित करना अनिवार्य होता है। यदि संसद बैठक शुरू होने के 6 सप्ताह के भीतर पारित नहीं कर देती है तो यह अध्यादेश समाप्त हो जायेगा यदि पारित हो गया तो यह हमेशा के लिए कानून बन जायेगा
- चूँकि सदन के दो सत्रों के बीच अधिकतम अंतराल 6 महीने का हो सकता है इसलिए अध्यादेश का अधिकतम 6 महीने और 6 सप्ताह तक लागू रह सकता है।
- कृष्ण कुमार सिंह बनाम बिहार राज्य (2017) मामले में सर्वोच्च न्यायलय ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश न्यायिक समीक्षा के अधीन है।
राष्ट्रपति की वीटो पावर
विधायिका की किसी कार्यवाही को विधि बनने से रोकने से रोकने की शक्ति वीटो शक्ति कहलाती है संविधान राष्ट्रपति को तीन प्रकार के वीटो देता है।
- आत्यंतिक वीटो (Absolute veto) - निर्धारित प्रकिया से पास बिल जब राष्ट्रपति के पास आये तो वह अपनी स्वीकृति या अस्वीकृति की घोषणा कर सकता है।
- निलम्बनकारी वीटो(Suspending Veto) - यदि राष्ट्रपति किसी विधयक पर अनुमति न देने के बजाय इसे संसद को पुनर्विचार के लिए लौटा देता है तो यह विधयक कुछ समय के लिए निलंबित हो जाता है। किन्तु यदि दोबारा विधयक पारित करके राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। तो राष्ट्रपति अनुमति देने के लिए बाध्य है। कुछ विधयक जैसे धन विधयक ,संविधान संशोधन विधयक को पुनर्विचार के लिए लौटाया नहीं जा सकता
- पॉकेट वीटो(Pocket Veto) - यदि राष्ट्रपति किसी विधयक पर कोई निर्णय न ले उसे अपने ऑफिस में वैसा ही पड़ा रहने दे इसे ही जेबी वीटो कहते है अब तक एक बार ज्ञानी जेल सिंह ने 1986 में डाक संशोधन के मामले में इस विधयक का प्रयोग किया था।


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