अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)

 Resolution Ias By Er Neelesh Tomar

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)- International Monetary Fund की स्थापना ब्रेटनवुड सम्मलेन के परिणाम स्वरूप Would Bank के साथ 1945 में की गयी किन्तु इसने मार्च 1947 से कार्य करना शुरू किया इसका मुख्यालय वांशिगटन डी. सी. अमेरिका में है वर्तमान में इसके सदस्य 189 देश है।  भारत इसका संस्थापक सदस्य है 




अध्यक्ष -वर्तमान में IMF की अध्यक्ष बुल्गारिया की अर्थशास्त्री क्रिस्टालिना जार्वीवा है  

उदेश्य -सदस्य देशो के प्रतिकूल भुगतान की स्थिति को सुधारने के लिये अल्पकालीन ऋण देना इसके साथ ही 

  • अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग  बढ़ाबा  देना 
  • बिनिमय दर में स्थिरता बनाये रखना 
  • सदस्य देशो के केंद्रीय बैंको को तकनीकी साहयता उपलब्ध कराना 
  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बिस्तार को सुगम बनाना 
  • कुछ विशेष कार्य जैसे गरीबी दूर करना तथा सरकारों को कुछ सलाह देना भी शामिल है 

SDR- Special Drawing Right विशेष आहरण अधिकार यह IMF की मुद्रा है इसे कागजी सोना भी कहा जाता है इसका मूल्य डॉलर ; यूरो ; ब्रिटिश पाउंड तथा जापानी येन के आधार पर तय किया जाता है 


सदस्य देश को अपनी सदस्यता के लिये 250 बोट मिलते है अर्थात उस सदस्य देश के मत का मूल्य 250 होता है इसके बाद उस देश को उसके कोटे के प्रति एक लाख SDR पर एक अतिरिक्त बोट मिलता है अर्थात जिसके खाते में जितने अधिक SDR होंगे उसके वोट की Value अधिक होगी IMF का नियंत्रण 24 सदस्यीय बोर्ड ऑफ़ गवर्नर के द्वारा किया जाता है भारत का वित्त मंत्री इसका पदेन गवर्नर होता है। वित्त मंत्री की अनुपस्थिति में RBI का गवर्नर भारत का प्रतिनिधित्व करता है। 
भारत का वित्त मंत्री अपने साथ -साथ बांग्लादेश ;भूटान और श्री लंका का भी प्रतिनिधित्व करता है 
सदस्य देश अपने कोटे का 25 % सोने के रूप में तथा शेष अपनी मुद्रा में देते है कोई भी संसोधन कम से कम 85% कोटा धारको की सहमति से ही हो सकती है। 
भारत का कोटा नये रेवेन्यू के साथ २.75 % हुआ है जब कि अमेरिका का कोटा 17 % के लगभग है 
जो IMF  सदस्य होता है उसे wourld Bank की भी सदस्यता मिल जाती है। 



दोस्तों उम्मीद करता हु की IMF के बारे में अच्छे से  समझ में  आ गया होगा अगर अब भी कुछ समस्या हो तो कमेंट में पूछ सकते हो 



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