प्रवाल एवं प्रवाल भित्तियाँ (Coral & Coral Reefs )

 Resolution Ias By Er Neelesh Tomar

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प्रवाल एवं प्रवाल भित्तियाँ (Coral & Coral Reefs )

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  • प्रवाल पालिप एक समुद्री जीव है ,जो एक सुरक्षा कवच में बन्द होता है। इस कवच का निर्माण समुद्री पानी से प्राप्त केल्सियम कार्बोनेट से होता है। 
  • प्रवाल भित्तियों का निर्माण प्रावली जीवो (मूंगा ) के अस्थिपंजरो के समेकन एवं संयोजन द्वारा होता है। 
  • प्रावली जीवो के विकास के लिए निम्न आवश्यक दशाएं होना अनिवार्य है। 
  1. प्रवाल मुख्य रूप से उष्ण कटिबंधीय सागरो (30'n -30's ) में पाये जाते है। क्यों कि इनके जीवित रहने के लिए 20'c -21'c तापमान उपयुक्त होता है। 
  2. प्रवाल कम गहराई (65 -75 मी०) पर पाये जाते है क्यों कि अधिक गहराई में सूर्य का प्रकाश एवं ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है। 
  3. प्रवालों के विकास के लिए जल अवसाद रहित होना चाहिए क्यों कि अवसादो के कारण प्रवालों के मुख बन्द हो जाते है। 
  4. पूर्ण स्वच्छ ,जल प्रवालो के लिए हानिकारक है यही कारण है कि नदियों के मुहानो पर प्रवाल कम पाये जाते है। 
  5. प्रवालो  विकास के लिए सागरीय लवणता 27 -30 % होना चाहिए 
  6. प्रवालो के विकास के लिए अन्त: सागरीय चबूतरों का होना आवश्यक है। 

प्रवाल भित्तियाँ निम्नलिखित तीन प्रकार की पायी जाती है। 

  • तटीय प्रवाल भित्ति - ये प्रवाल भित्तियाँ महाद्वीप एवं दूसरे तट से लगे होते है परन्तु कभी -कभी इनके एवं स्थलों के बीच अन्तराल हो जाता है जिसमे जल भरने से लैगून का निर्माण होता है जिसे बोट चैनल कहा जाता है। 

  • अवरोध प्रवाल भित्ति -ये प्रवाल भित्तियाँ सागर तट से दूर समान्तर एवं विशाल श्रेणी के रूप में फैली होती है। जैसे विश्व की सबसे बड़ी अबरोध प्रवाल भित्ति ऑस्ट्रेलिया के उ० पूर्वी तट पर स्थित ग्रेट - वेरियर रीफ है जिसकी लम्बाई 1900 km से भी अधिक एवं चौड़ाई 160 km है। 

  • वलयाकार प्रवाल भित्ति - इस प्रवाल भित्ति की आकृति घोड़े के नाल या मुद्रिका के समान होती है। इसकी स्थति तट से दूर किसी जलमग्न पठार के ऊपर होती है। इस प्रवाल भित्ति के बीच में लैगून होती है। 

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