Resolution Ias By Er Neelesh Tomar
भारत में पुर्तगालियों का आगमन
1498 में वास्कोडिगामा के भारत आगमन ने यूरोपीय व्यापारियों के लिए भारत का द्वार खोल दिया। यूरोपीय व्यापारियों का भारत के राजा -महाराजाओं ने भिन्न -भिन्न कारणों से स्वागत किया। भारत में व्यापार के लिए सर्वप्रथम पुर्तगाली व्यापारी आये।
वास्कोडिगामा के भारत आगमन से दोनों देशो के मध्य व्यापार के क्षेत्र में एक नए युग का आरम्भ हुआ। पुर्तगाली व्यापारियों ने भारत में कालीकट ,गोवा ,दमन ,दीव एवं हुगली के बंदरगाहों पर व्यापारिक कोठियाँ स्थापित की। काली मिर्च और मसलो के व्यापार पर अपना एकाधिकार स्थापित करने के लिए उन्होंने 1503 में कोचीन में पहले दुर्ग की स्थापना की 1505 में पुर्तगाल सरकार ने फ्रांसिस्को द अल्मेडा को भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय बनाकर भेजा 1509 में पुर्तगाली वायसराय अल्बुकर्क ने बीजापुर के शासक यूसुफ आदिल शाह से गोवा को छीन लिया इस प्रकार 1515 ई.तक पुर्तगाली व्यापारी भारत के साथ न केवल व्यापार पर एकाधिकार प्राप्त कर चुके थे वरन उन्होंने समुद्र तटीय क्षेत्रों पर अधिकार करके प्रशासन करना भी आरम्भ कर दिया था।
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