Resolution Ias By Er Neelesh Tomar
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संसद की संयुक्त बैठक अनु० 108
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किसी भी समय कोई विधेयक एक सदन से पारित होने के बाद दूसरे सदन में भेजा गया दूसरा सदन उस विधयक को ख़ारिज कर देता या दोनों सदनों में किसी संसोधन को लेकर असहमति पैदा हो गई हो या दूसरे सदन में इस विधयक को 6 माह से अधिक समय बीत गया हो तो ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुला सकता है। यदि वह विधयक संयुक्त बैठक में सामान्य बहुमत से पारित हो जाता है तो उसे पारित मान लिया जाता है।
- संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है। यदि वह नहीं है तो लोकसभा का उपाध्यक्ष यदि वह भी नहीं है तो राज्यसभा का उपसभापति उस बैठक की अध्यक्षता करता है।
- धन विधयक और संविधान संशोधन विधयक के लिए संयुक्त बैठक नहीं हो सकती है।
- यदि राष्ट्रपति ने संयुक्त बैठक की घोषणा कर दिया और उस दौरान लोकसभा भंग हो जाती है तो भी वह बैठक होगी और उसी लोकसभा द्वारा विधयक पारित कराया जायेगा
अब तक संसद ने दोनों सदनों के बीच मतभेदों को हल करने के लिये केवल तीन संयुक्त बैठक का आयोजन किया गया है।
- प्रथम संयुक्त बैठक का आयोजन वर्ष 1961 में किया गया दहेज़ निषेध विधेयक के मामले में
- दुसरी संयुक्त बैठक वर्ष 1978 में आयोजित की गई बैंकिंग सेवा आयोग (निरसन) विधेयक के मामले में
- तीसरी संयुक्त बैठक का आयोजन वर्ष 2002 में आतंकवाद निरोधक विधेयक के मामले में


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