शेयर बाजार क्या है तथा कितने प्रकार के होते है

 Resolution Ias By Er Neelesh Tomar

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शेयर बाजार क्या है तथा कितने प्रकार के होते है 

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शेयर किसी कंपनी के अंश पत्र होते है। जिसको रखने वाले के पास मालिकाना हक होता है कंपनी के लाभ होने पर इन्हे लाभ और नुकसान होने पर इन्हे भी नुकसान सहना पड़ता है। 

शेयर बाजार के दो भाग होते है 

  1. प्राथमिक बाजार(Primary Share Market) 
  2. द्वितीय बाजार (Secondary Share Market )

प्राथमिक बाजार - वह बाजार होता है जिसमे पहली बार कोई कंपनी शेयर जारी करती है। कंपनी द्वारा पहली बार जारी किये गए इन शेयरो को IPO (Intial Public Offering) कहा जाता है। इसके बाद जितनी बार कंपनी द्वारा जितने शेयर जारी किये जाते है। उसे FPO (Follow On Public Offer) कहा जाता है। 


द्वितीय बाजार (Secondry Share Market)- में शेयर धारको के बीच शेयरों की खरीद बिक्री होती है। यही बास्तव में शेयर बाजार होता है। 


Face Value - कंपनी के द्वारा जितने आरंभिक मूल्य के साथ शेयर जारी किये जाते है। उसे ही Face Value कहा जाता है इस Face Value से कम कीमत पर कोई शेयर नहीं बेचा जा सकता या उस Face Value पर या उससे अधिक कीमत पर बेचा जायेगा 


लाभांश - कंपनियों के द्वारा प्रतिवर्ष अपने कुल लाभ का एक निश्चित हिस्सा शेयर धारको को बाँटा जाता है। इसे ही लाभांश कहा जाता है यह लाभांश Face Value पर दिया जाता है। 
यदि किसी कंपनी का शेयर अंकित मूल्य (Face value) पर बिकता है तो इसे Issued at Par कहा जाता है। और यदि अंकित मूल्य से अधिक पर बिकता है तो इसे Issued at Prenium कहा जाता है। 
शेयर दो प्रकार के होते है 
  1. इक्विटी शेयर 
  2. परेफरेंस शेयर 

इक्विटी शेयर - इन शेयर धारको को मालिकाना हक मिला होता है। इनको बोट देने का अधिकार होता है कंपनी के घाटे या मुनाफे के स्थिति में इनका दायित्य अधिक होता है। किन्तु इनका दायित्य अपने शेयर के अनुपात में ही होता है 


परेफरेंस शेयर
- ेंइन शेयर धारको को कंपनियों में मताधिकार नहीं होता इनको एक निश्चित दर से लाभांश मिलता है पहले लाभ का बितरण इनको होता है फिर इक्विटी शेयर धारको को कंपनी के दिवालिया होने पर पहले इनका भुगतान किया जायेगा बाद में इक्विटी शेयर धारको का 


Bull &Bears - यह दोनों शेयर बाजार के दलाल होते है। Bull शेयरो की कीमतों को जानबूझ कर बड़ा कर लाभ कमाने का प्रयास करते है जब कि Bears शेयरो की कीमत को जानबूझ कर घटाकर लाभ कमाने का प्रयास करते है। 

ब्लू चिप शेयर - ऐसे शेयर जिनको खरीदने में जोखिम बहुत कम रहता है। अर्थात इनमे नुकसान होने की संभावना बहुत कम होती है अर्थात एक निश्चित दर से लाभ होता रहेगा ऐसे कंपनियों को ब्लू चिप कंपनी कहते है। 


Buy Back - यदि किसी कंपनी के द्वारा अपने ही शेयरो को स्वंय खरीदा जाये तो इसे Buy Back कहा जाता है ऐसा सामान्यता: दो कारणों से होता है या तो उस कंपनी के शेयरो का मूल्य लगातार घट रहा हो तो उसे पुन:पटरी पर लाने के लिए शेयर खरीदा जाये या फिर कंपनी के पास अतिरिक्त पूँजी है और उस पूँजी के निवेश के लिए अपने शेयरो से अच्छा कोई विकल्प न हो तो अपने ही शेयरो को खरीद लेगी 

इनसाइडर ट्रेडिंग - किसी कंपनी के मालिक या उसके प्रबंधन से जुड़े हुए लोग इनसाइडर कहे जाते है। इनके पास कंपनी से संबंधित सभी गुप्त सूचनाये रहती है यह लोग इस सुचनायो के आधार पर कंपनी के शेयर कार्यभार  छेड़ -छाड़ कर सकते है इसी कारण इन लोगो के द्वारा शेयर कार्यभार करने पर रोक लगायी जाती है। 


Sweat Share
  - किसी कंपनी द्वारा अपने ही कर्मचरियो को कुछ छूट के साथ  शेयर बेचे जाते है। उन्हें ही Sweat Share कहते है। 


शॉर्ट सैलिंग - यदि किसी व्यक्ति द्वारा अपने पास उपलब्ध शेयरो से अधिक मात्रा में शेयर की बिक्री का समझौता कर लिया जाये तो इसे ही शॉर्ट सैलिंग  कहते है। 

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