स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण मिशन


                             Resolution ias By Er Neelesh Tomar

स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण मिशन 

उन्नीसवीं सदी के प्रमुख समाज सुधारको में रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। रामकृष्ण परमहंस का जन्म 1836 में बंगाल के हुगली जिले में हुआ। वे बचपन से ही अध्यातिमक प्रवृति के थे तथा उन्होंने सभी धर्मो की पवित्रता को स्वीकार किया। 

  • भारतीय संस्कृति को महान बताते हुए उन्होंने मूर्ति पूजा को सही बताया 
  • स्वामी रामकृष्ण परमहंस से उस समय के सभी सुधारक प्रभावित थे। 
  • उनके उपदेशो व शिक्षाओं को जन -सामान्य तक पहुंचाने का कार्य उनके शिष्य स्वामी विवेकानंद ने किया। 
स्वामी विवेकानंद 

              का जन्म 1863 में बंगाल में हुआ उनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। ज्ञान की खोज में ही वे रामकृष्ण परमहंस से मिले और उनसे प्रभावित होकर 1897 में उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की 

इस मिशन का प्रमुख उद्देश्य 

  • भारतीय राष्ट्रवाद को अध्यात्म की अच्छाईयों से जोड़कर समाज सेवा करना था। 
  • रामकृष्ण मिशन ने सभी धर्मो व पूजा पद्धतियों को आदर भाव से देखा तथा सभी की आस्थाओं का सम्मान किया 
  • स्वामी विवेकानंद ने भारतीयों को जाग्रत करने के लिए गरीबी दूर करने के प्रयासों पर बल दिया 
  • उन्होंने भारतीय संस्कृति को विश्व की सर्वोत्तम संस्कृति बताते हुए विदेशो में भी इसका प्रचार -प्रसार किया 
  • मिशन ने बाढ़ ,अकाल ,प्राकृतिक विपदाओं एवं महामारियों के समय समाज में अनेक राहत कार्य किये एवं अनेक शिक्षण संस्थाएँ भी खोलने का काम किया 

स्वामी विवेकानंद युवाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत मानते थे। उन्होंने भूखे को भोजन ,अज्ञानी को ज्ञान एवं निर्धन की प्रेमपूर्वक सहायता करने को ही सबसे बड़ी पूजा माना था। 


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