स्वामी दयानन्द सरस्वती एवं आर्य समाज


 
                                   Resolution ias By Er Neelesh Tomar


स्वामी दयानन्द सरस्वती एवं आर्य समाज 


1875 में दयानन्द सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की स्वामी दयानन्द ने बताया की मनुष्य को ईश्वर द्वारा प्राप्त सारा ज्ञान वेदो में विधमान है ,अत:अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाना चाहिए। इनका प्रमुख ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश है। आर्य समाज का भारतीय सामाजिक ,धार्मिक ,साहित्यिक व शैक्षणिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है। 59 वर्ष की आयु में उनका देहावसान हो गया 
  • स्वामी दयानन्द सरस्वती के बचपन का नाम मूलशंकर था 
  • हिंदी भाषा के प्रचार -प्रसार एवं स्वराज्य की बात करने वाले वह पहले भारतीय थे। 
  • आर्य समाज के अनुयायी दस -सिद्धांतो का अनुसरण करते है। 
  • आर्य समाज के अनुयायियों ने बाल विवाह का विरोध एवं विधवा पुनर्विवाह का समर्थन किया 
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