Resolution Ias By Er Neelesh Tomar
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भुगतान संतुलन (Balance Of Payment )
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भुगतान संतुलन किसी एक वित्तीय वर्ष में किसी देश से बाहर जाने वाला धन तथा उसी वित्तीय वर्ष में दूसरे देशो से उस देश में आने वाले धन के अंतर को दिखाता है। यदि इन दोनों की मात्रा बराबर है तो भुगतान के संतुलन की स्थिति है यदि दूसरे देशो को किया जाने वाला भुगतान ज्यादा है। तो हमारा भुगतान संतुलन प्रतिकूल है। और यदि दूसरे देशो से हमें मिलने वाला भुगतान अधिक है तो हमारा भुगतान संतुलन अनुकूल है।
भुगतान संतुलन के दो खाते है
- चालू खाता
- पूँजीगत खाता
(a ) चालू खाता - के दो प्रकार है (1 ) दृश्य मद (2 ) अदृश्य मद
भुगतान संतुलन के चालू खाते में भी दो मदे होती है। दृश्य मद और अदृश्य मद
दृश्य मद -में वस्तुओं के व्यापार को शामिल किया जाता है। इसमें ऐसी सभी वस्तुओं के व्यापार को शामिल किया जाता है जिनका रिकॉर्ड बंदरगाह पर होता है।
अदृश्य मद -में सेवाओं के व्यापर तथा एकपक्षीय हस्तांतरण जैसे गिफ्ट ,चंदा ,साहयता आदि इसके आलावा विदेशी पर्यतको द्वारा खरीदी गयी वस्तु को भी इसमें शामिल करते है। इसके साथ ही विदेशो से मिलने वाले लाभ और लाभांश भी इसी में शामिल होते है।
चालू खाते अदृश्य मदो में भारत हमेशा ही सकारात्मक स्थिति में रहा है।
(b) पूँजी खाता - भी दो प्रकार के होते है।
- ऋण द्वारा आने वाला पैसा
- गैर ऋण से आने वाला पैसा
गैर ऋण ऋण प्रवाह में विदेशी निवेश ( FDI ,FII ); NRI की जमा शामिल होती है। भुगतान संतुलन यदि पूँजीगत खाते में अनुकूल स्थिति होने के कारण सकारात्मक दिखायी दे रहा है या अनुकूल है तो यह शुद्रण अर्थव्यबस्था का परिचायक नहीं है। क्यों कि हो सकता है कि चालू व्यापार खाते में हमें लगातार घाटा हो रहा हो और पूँजीगत खाते के बजय स्थिति अनुकूल दिखायी दे रही हो अर्थात अनुकूल भुगतान संतुलन और प्रतिकूल व्यापार शेष की स्थिति साथ -साथ हो सकती है। यह स्थिति अर्थव्यबस्था के लिए अच्छी नहीं होती
भुगतान संतुलन रोकने के उपाय
(1) व्यापारिक उपाय - इसके अंतगर्त निर्यात को बढ़ाबा देने तथा अतिरिक्त आयात पर नियंत्रण लगाना चाहिये
(2) मौद्रिक उपाय -इसमें जरुरत पड़ने पर मौद्रिक नीति को सख्त या लचीला बनाना
(3) राजकोषीय उपाय -इसके अंतगर्त राजकोषीय घाटे को कम करने का उपाय करना चाहिये
(4) इसके आलावा कुछ और उपाय जिससे हमारे यहां विदेशी मुद्रा का प्रवाह हो जैसे विदेशी पर्यटन का आगमन


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