Resolution Ias By Er Neelesh Tomar
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आपातकाल उपबन्ध (राष्ट्रीय आपात अनु० 352 )
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संविधान का भाग 18 अनुच्छेद 352 से 360 तक आपात उपबन्धों के बारे में है। आपात प्रावधान जर्मनी के संविधान से प्रेरित है। भारतीय संविधान में तीन प्रकार के आपात का उल्लेख किया गया है।
- राष्ट्रीय आपात
- राष्ट्रपति शासन
- वित्तीय आपात
राष्ट्रीय आपात (अनु० 352 )- की घोषणा राष्ट्रपति के द्वारा युद्ध ;बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर केंद्रीय मंत्रीमंडल की लिखित सलाह पर किया जाता है। राष्ट्रपति द्वारा घोषणा करने के एक माह के अंदर संसद के द्वारा इसे विशेष बहुमत से इसका अनुमोदन किया जाना अनिवार्य है। एक बार संसद द्वारा अनुमोदन करने के बाद इसे 6 माह के लिये आगे बढ़ाया जा सकता है। आपात की घोषणा को बीच में ही समाप्त करने के लिये यदि किसी समय लोकसभा के 1 /10 सदस्य प्रस्ताव पारित करके राष्ट्रपति या लोकसभा अध्यक्ष से कहते है तो लोकसभा की विशेष बैठक बुलायी जाएगी और यदि उस बैठक में सामान्य बहुमत से प्रस्ताव पारित हो जाता है तो उसको राष्ट्रपति द्वारा बापस ले लिया जायेगा
यदि आपातकाल युद्ध एवं बाह्य आक्रमण के आधार पर घोषित हुआ है। तो अनु० 19 के द्वारा नागरिको को मिले अधिकार निलंबित हो जाते है। और यदि यह आपात तीनो में से किसी आधार पर लगा है। तो इस स्थिति में राष्ट्रपति अपने आदेश से अनु० 20 और अनु० 21 को छोड़कर अन्य मूल अधिकार को निलंबित कर सकते है।
- मूल संविधान में सशस्त्र विद्रोह शब्द के स्थान पर आन्तरिक अशान्ति शब्द था जिसे 44 वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है
- राष्ट्रपति आपात की उद्घोषणा तभी करता है ; जबकि मंत्रिमंडल इस आशय के विनिश्चय की लिखित सूचना की अनिवार्यता 44 वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ी गयी है।
- आपात की प्रथम घोषणा चीनी आक्रमण के समय 26 अक्टूबर 1962 को की गयी थी दूसरी बार 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान से युद्ध के समय तथा तीसरी बार घोषणा 26 जून 1975 को आन्तरिक अशांति की आशंका के आधार पर की गयी।


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