Resolution Ias By Er Neelesh Tomar
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महत्वपूर्ण प्राचीन भारत इतिहास के One liner प्रश्न एवं उत्तर
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भारत में इतिहास का निर्माण 1784 में गठित एशियाटिक सोसायटी ऑफ़ बंगाल से माना जाता है
भारत में पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की स्थापना 1861 में सर अलेक्जेंडर कनिंघन के नेतृत्व में हुआ
अनु० 49 - में पुरातात्विक महत्व के स्मारकों के संरक्षण का प्रावधान है
मानव द्वारा सर्वप्रथम प्रयुक्त धातु तांवा (नवपाषाणकाल)
मनु एवं पतंजलि शुंगो के दरबारी थे इन्होने क्रमशः मनुस्मृति एवं महाभाष्य नामक ग्रन्थ लिखे
गुप्त काल में हूड आक्रमण तोरमाण के नेतृत्व में स्कन्द गुप्त के समय हुआ
त्रिपक्षीय शक्तियो में बंगाल के पाल ,दक्षिण के राष्ट्रकूट एवं उत्तर भारत के गुर्जर प्रतिहार शामिल हुए
शक संवत (57 ई.पू.) मालवा के विक्रमादित्य द्वारा प्रारम्भ किया गया
जुलाई एवं अगस्त माह का नाम प्रसिद्ध रोमन सम्राट जूलियस सीजर एवं आगस्टस के नाम पर पड़ा
मेसोपोटामिया के अभिलेखों में हड़प्पा सभ्यता के लिए मेलुहा शब्द का प्रयोग कपास उत्पादन के अर्थ में किया गया
ऋग्वेद में सिंधु सर्वाधिक वर्णित नदी है
छान्दोग्य उपनिषद में कृष्ण का ,श्वेताश्वर में शिव का उल्लेख मिलता है
पुनर्जन्म का सिद्धांत सर्वप्रथम शतपथ ब्राह्मण में मिलता है
अर्थववेद में सभा एवं समिति को प्रजापति की दो पुत्रिया कहा गया
पूषन ऋग्वेदिक काल में पशुओं के देवता हुए किन्तु उत्तर वैदिक काल में शूद्रों के देवता हुए
अर्थववेद में परीक्षित को मृत्यु लोक का देवता बताया गया
ऐतरेय ब्राह्मण में पुत्री को दुखो का कारण तथा शतपथ ब्राह्मण में स्त्री को अर्धागिनी कहा गया
श्रीमद भगवतगीता महाभारत का एक अंश है यह महाभारत के छठे पर्व भीष्म पर्व से लिया गया है इसमें 18 अध्याय व 700 श्लोक है, इसे उपनिषदों का सार कहा जाता है
सिकंदर खैबर दर्रे को पार करके पंजाब एवं सिंधु के कई राज्यों को विजीट किया इसमें सबसे महत्वपूर्ण सिंधु एवं झेलम के बीच का तक्षशिला (राजा अम्मी) था। पोरस का राज्य झेलम एवं व्यास नदियों के मध्य स्थित था
संगम साहित्य दक्षिण भारत के तमिल साहित्य है जिनका विकास चोल ,चेर ,पाण्ड्य राजाओं के संरक्षण में हुआ था
अपने अभिलेखों में हिंदी की देवनागरी लिपी का प्रयोग करने वाला प्रथम राजवंश चंदेल है
बिजौलिया अभिलेख में चौहानो की पूरी वंशावली मिलती है
दिलवाड़ा के जैन मंदिर में जैन तीर्थकर आदिनाथ की मूर्ती है
मधुवन व बांसखेडा अभिलेख से हर्षवर्धन के पूर्वजो के विषय में जानकारी मिलती है
मंदसौर अभिलेख जिसकी रचना वत्स्भट्टी ने की थी जिसमे कुमार गुप्त के शासन के बारे में जानकारी मिलती है
विष्णु पुराण तथा भागवत पुराण में ऋषभदेव का उल्लेख नारायण के रूप में हुआ


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