भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) अनु० 148 से 151

 Resolution Ias By Er Neelesh Tomar

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भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) अनु० 148 से 151 

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नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। किन्तु उसको पद से संसद के दोनों सदनों के समावेदन पर ही हटाया जा सकता है। जिसका आधार साबित कदाचार या असमर्थता होगा इसका कार्यकाल 6 वर्ष होगा लेकिन यदि इससे पूर्व 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेता है तो वह अवकाश ग्रहण कर लेगा 

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को लोकधन का संरक्षक कहा जाता है इसे लोकलेखा समिति का मार्गदर्शक कहा जाता है। भारत तथा प्रत्येक राज्य एवं संघ राज्य की संचित निधि से किये गए सभी व्यय विधि के आधीन हुए इस बात की जाँच करता है 

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक संघ से संबंधित रिपोर्ट राष्ट्रपति को तथा राज्यों से संबंधित रिपोर्ट राज्यपाल को देता है। जिसे राष्ट्रपति संसद में रखवाता है तथा राज्यपाल उसे बिधानमंडल में रखवाता है 

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के संबंध में उसकी शक्तियों और उसके कार्यो के निर्धारण के लिए कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है। 

सेवा निवृत्ति के पश्चात यह भारत सरकार के आधीन कोई पद धारण नहीं कर सकता इसके बेतन एवं भत्ते भारत की संचित निधि पर भरित होते है। 

  • अम्बेडकर ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को संविधान का सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी बताया 
  • संघ के लेखा का कार्य CAG नहीं करता यह सिर्फ लेखा परीक्षण का कार्य करता है वहाँ यह कार्य बिभागीय सचिवों द्वारा किया जाता है किन्तु राज्यों के मामले में लेखा और लेखा परिक्षण दोनों कार्य CAG के द्वारा किया जाता है। 
  • राष्ट्रपति के आदेश पर वह स्थानीय निकायों की लेखा परीक्षा करता है।  



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