Resolution Ias By Er Neelesh Tomar
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मौलिक अधिकार भाग 3 अनु० 12 से 35
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मूलअधिकार जिसे संविधान की आत्मा एवं मैग्नाकार्टा की तरह माना जाता है हमारे संविधान का (अमेरिका के Bil of Right से प्रेरित) सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाग है। संविधान सभा 54 सदस्यीय मूल अधिकार समिति के अध्यक्ष सरदार पटेल थे।
Exam Point -
- मूल अधिकारो का सर्वप्रथम विकास ब्रिटेन में हुआ
- भारत में मौलिक अधिकारों की सर्वप्रथम माँग 1895 के स्वराज बिधेयक में की गयी
- 1928 के नेहरू रिपोर्ट में मूल अधिकार देने की माँग की गयी
- अनु० 19 (1) A से सूचना का अधिकार 12 अक्टूबर 2005 से लागू प्रेस की स्वन्त्रता इससे प्राप्त
- मौलिक अधिकारों को अमेरिका के संविधान से लिया गया है
- 1931 में कराची अधिवेशन (अध्यक्ष पटेल) में कांग्रेस के घोषणा पत्र में मूल अधिकारों की माँग की
- मूल अधिकारों का प्रारूप जवाहरलाल नेहरू ने बनाया था
मूल अधिकारों में संशोधन - सुप्रीम कोर्ट ने गोलकनाथ vs पंजाब राज्य में कहा था कि मूल अधिकारों का संशोधन नहीं किया जा सकता लेकिन केशवानंद भारती vs केरल राज्य (1973) के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गये फैसले के बाद कि अब संसद मूल अधिकार सहित पूरे संविधान में संशोधन कर सकती है किन्तु इस संशोधन से संविधान के मूल ढांचे पर कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिये
Note - 44 वे संविधान संशोधन द्वारा 1978 में जनता पार्टी सरकार (मोरार जी देसाई) की सरकार ने संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकार की सूची (अनु० 31) से हटाकर अनु० 300 A में कानूनी अधिकार के रूप में शामिल किया
आपातकाल - केबल अनु० 352 में न कि राष्ट्रपति शासन एवं बित्तीय आपात में 44 वे संशोधन 1978 के बाद स्थिति यह है कि अनु० 20 एवं अनु० 21 को छोड़कर सभी मूल अधिकार स्थगित किये जा सकते है
अनु० 13 - मूल अधिकारों के संरक्षण का दायित्व न्यायपालिका (SC एवं HC) को दिया गया है
संविधान में 6 प्रकार के मूल अधिकार दिए गए है
- समानता का अधिकार अनु ० 14 से अनु० 18
- स्वन्त्रता का अधिकार अनु ० 19 से अनु० 22
- शोषण के विरुद्ध अधिकार अनु० 23 से अनु० 24
- धार्मिक स्वन्त्रता का अधिकार अनु० 25 से अनु० 28
- शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार अनु० 29 से अनु० 30
- संवैधानिक उपचारो का अधिकार अनु० 32


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