स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 19 से अनुच्छेद 22

Resolution Ias By Er Neelesh Tomar

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स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 19 से अनुच्छेद 22 

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स्वतंत्रता का अधिकार अनु० 19 से अनु० 22 

अनु० 19 - इसके द्वारा नागरिको को 6 प्रकार की स्वतंत्रता दी गयी है 

  1. भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता इसी अनुच्छेद के द्वारा मीडिया को स्वतंत्रता मिलती है 
  2. शांतिपूर्ण तरीके से कोई भी सम्मेलन करने की स्वतंत्रता 
  3. कोई संघ बनाने की स्वतंत्रता 
  4. भारत के राज्य क्षेत्र में कही आने जाने की स्वतंत्रता 
  5. देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने की स्वतंत्रता 
  6. जीविका के लिए कोई व्यापार करने की स्वतंत्रता  
Note - अनु० 19 - केवल भारतीय नागरिको को प्राप्त है भारत में रहने वाले विदेशियों को नहीं 

अनु० 20 - अपराधों के लिए दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण - इसके तहत तीन प्रकार की स्वंत्रताये दी गई है 

  1. किसी भी व्यक्ति को उसके एक अपराध के लिए सिर्फ एक बार ही दण्ड दिया जा सकता है 
  2. किसी भी व्यक्ति को उसके किसी कृत्य (कार्य) के लिए दोषी तभी माना जायेगा जब उस कृत्य (कार्य) करने के समय वह कार्य कानून के द्वारा अपराध की श्रेणी में रखा गया हो 
  3. किसी भी व्यक्ति को अपने ही मामले में गवाह बनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता इसी आधार पर नार्को टेस्ट को अनुचित न्यायालय ने घोषित किया है। कोई व्यक्ति स्वेच्छा से नार्को टेस्ट करा सकता है जबरन नहीं 
अनु० 21 - प्राण एवं दैहिक स्वंतत्रता - किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रकिया के अतिरिक्त उसके जीवन और दैहिक स्वंतत्रता के अधिकार से बंचित नहीं किया जा सकता है। यह अनुच्छेद व्यक्ति को  जीने की स्वतंत्रता देता है उच्चतम न्यायालय द्वारा इस अनुच्छेद के अंतर्गत आने वाले अधिकारों का व्यापक  बिस्तार किया गया है न्यायलय के द्वारा कहा गया है कि जीवन जीने के लिए अनुकूल परिस्थतियाँ भी आवश्यक है और इसी आधार पर न्यायालय ने स्वच्छ बायु ,स्वच्छ पेयजल आदि की आवश्यकता तथा निजता (privacy) के अधिकार को भी इसी अनु० का भाग माना गया है। 

अनु० 21 (A)- यह अनु० 86 वे संविधान संशोधन 2002 में जोड़ा गया इसके अनुसार 6 से 14 साल के बच्चो को राज्य निशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएगा 

अनु० 22 - गिरफ़्तारी के विरुद्ध संरक्षण - अगर किसी भी व्यक्ति को मनमाने ढंग से गिरफ्तार कर लिया गया है तो उसे तीन प्रकार की स्वतंत्रता प्रदान की गई है। 

  1. किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय सबसे पहले गिरफ्तार करने का कारण बताना होगा 
  2. उसे अपने पसंद के वकील से सलाह लेने का अधिकार होगा 
  3. किसी भी व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के बाद 24 घंटे के अंदर न्याय मजिस्टेट के सामने पेश करना अनिवार्य होगा 

Note - यदि किसी व्यक्ति को निवारक निरोध के अंर्तगत गिरफ्तार किया जाता है तो उसे तीन महीने तक सामान्य स्थिति में बिना मजिस्टेट के सामने पेश किये उसे जेल में बंद रखा जा सकता है किन्तु यदि संसद चाहे तो और अधिक समय के लिए भी किसी व्यक्ति को निवारक निरोध के अंतर्गत जेल में बंद रखने का प्रावधान कर सकती है। 



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