World Trade Organisation (WTO), विश्व व्यापार संगठन

Resolution Ias By Er Neelesh Tomar

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World Trade Organisation (WTO), विश्व व्यापार संगठन 

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WTO की स्थापना 1 जनवरी 1995 को हुयी इसका मुख्यालय जेनेवा में है इसके सदस्य देश 195 है WTO (विश्व व्यापार संगठन) GATT का ही विकसित रूप है अन्तर्राष्टीय स्तर पर बहुपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1947 में GATT समझौता हुआ था General Agriment Trade and terif व्यापार और प्रशुल्क पर समझौता यह समझौता एक अनौपचारिक समझौता था यह कानूनी रूप से वाध्यकारी समझौता नहीं था इसमें सिर्फ वस्तुओं के व्यापार को ही शामिल किया गया था इस समझौते को कानूनी आधार देने तथा व्यापार को नियंत्रित करने के लिए एक स्थायी संगठन के लिए कई दौर की वार्ताए होती रही अंत में आठवे दौर की वार्ता उरुग्वे दौर की वार्ता में सफलता मिली 123 देशो ने मोरक्को के मराकेश में एक समझौते पर हस्ताक्षर किया व WTO, 1 जनवरी 1995 में अस्तित्व में आ गया 

WTO के उद्देश्य 

  • बहुपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना 
  • वस्तुओं व सेवाओं के उत्पादन पर बढ़ावा देना 
  • पर्याबरण संरक्षण को बढ़ावा देना 
  • सतत विकास को बढ़ावा देना 
  • जीबन स्तर में बृद्धि करना 
WTO के दो प्रमुख अंग है 
  1. DSB (DIspute Satelment Org.)
  2. TPRB (Trade Policy Review Body)
DSB (Despute Satelment Org.) विवाद निवारण समिति - यह WTO का मुख्य अंग है। जो सदस्य देशो के मध्य हुए विवादों का निपटारा करता है। 

TPRB (Trade Policy Review Body) व्यापार नीति समीक्षा समिति - यह समिति विश्व स्तर पर चल रही व्यापारिक नीतियों की समीक्षा तथा सुधार करने का प्रयास करती है। इसके आलावा एक वस्तु से संबंधित तथा एक सेवा से संबंधित परिषद काम करती है। 

Dumping - Antidumping 

यदि कोई देश किसी दूसरे देश में अपने उत्पादों को कम कीमत पर बेचता है तो उसे ही Dumping कहा जाता है। ऐसा कोई देश दूसरे देश के बाजार पर कब्ज़ा करने के उद्देश्य से भी कर सकता है और ऐसी स्थिति में WTO के नियमो के अनुसार पीड़ित देश को यह छूट दिया गया है की आने वाले सामान पर अधिक मात्रा में शुल्क लगा सकता है जिससे उस सामान के अतिरिक्त प्रवाह रोका जा सके इस शुल्क को ही Antidumping कहा जाता है। 

MFN (Most Favour Nation)

यदि कोई देश किसी दूसरे देश को व्यापार के संबंध में अधिक वरीयता देता है तो वह देश दूसरे देश के लिए MFN देश कहा जाता है। WTO के नियमो के तहत यदि कोई देश किसी दूसरे देश को MFN का दर्जा देता है तो अन्य सभी सदस्य देशो को इसका लाभ मिलेगा 

TRIPS (Trade Releted Intellectual Property) बौद्धिक सम्पदा अधिकारों पर समझौता

इसके अंतगर्त ट्रेड मार्क ,ओधोगिक डिज़ाइन ,कॉपीराइट ,भौगोलिक संकेतक ,IC चिप तथा किसी व्यक्ति द्वारा खोजी गई कोई अन्य वस्तु इन सब पर पेटेंट मिलता है। पहले प्रकिया पेटेंट की प्रकिया थी वर्तमान में प्रोडक्ट पेटेंट की व्यवस्था हो गई भारत ने भी इसे 2005 से अपना लिया 

कुछ अन्य समझौते 

बस्त्र पर समझौता - पहले इसका नाम MFA था अब इसका नाम ATC हो गया 2005 से बस्त्र व्यापार से कोटा प्रणाली को समाप्त कर दिया गया 

सेवाओं पर समझौता 

इसमें चार प्रकार की सेवाएं है 
MOD 1 - यह सेवा एक देश के व्यक्ति द्वारा अपने देश में बैठे-बैठे  दूसरे देश को देना 
MOD 2 - यह सेवा एक देश के व्यक्ति द्वारा दूसरे देश में आकर सेवा लेना 
MOD 3 - यह सेवा एक देश की  कंपनी द्वारा दूसरे देश में अपनी कंपनी स्थापित करना और तब सेवा देना 
MOD 4 - यह सेवा एक देश के व्यक्ति द्वारा दूसरे देश में जाकर सेवा देना 

सब्सिडी 
सब्सिडी - चार प्रकार की होती है 
  1. ग्रीन बॉक्स सब्सिडी 
  2. ब्लू बॉक्स सब्सिडी 
  3. अम्बर बॉक्स सब्सिडी 
  4. रेड बॉक्स सब्सिडी 
ग्रीन बॉक्स सब्सिडी - यह सब्सिडी कृषि अनुसंधान पर्याबरण व पशु संरक्षण पर दी जाती है यह सब्सिडी को बंद नही करना है। 

ब्लू बॉक्स सब्सिडी - यह सब्सिडी किसानो को बीज ,खाद ,सिचाई के लिए दी जाती है WTO के अनुसार इस सब्सिडी को धीरे - धीरे कम करना है। 

अम्बर बॉक्स सब्सिडी - यह सब्सिडी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 

रेड बॉक्स सब्सिडी - यह सब्सिडी निर्यात को बढ़ावा देने तथा दूसरे देशो के उत्पादन को अपने देश में रोकने के लिए दी जाती है WTO के अनुसार यह सबसे खतरनाक सब्सिडी है और इसको समाप्त करना है 

कुछ अन्य समझौते 

NAMA समझौता - गैर कृषि वस्तुओं के बाजार पहुंच से समझौता यह समझौता ओधोगिक उत्पादों को बढ़ावा देने से संबंधित है इसके संबंध में स्विच फार्मूला लाया गया है। लेकिन अभी यह स्वीकृति नहीं हो पाया 

SSM (Special Self Gard Mechanism)- विकासशील देशो द्वारा अपने लिए विकसित देशो से कुछ विशेष  सुरक्षा को मंगा गया है। ताकि विकसित देशो का सामान यदि विकासशील देशो में अधिक मात्रा में आने लगे तो इसे रोकने के लिए विकासशील देशो को अधिकार दिया जाये लेकिन अभी विकसित देशो ने अभी यह समझौता नहीं माना 

TRIMS (Trade Relative Investment Measures)- यह समझौता सदस्य देशो के बीच निवेश को बढ़ाबा देने के लिए किया गया ताकि विभिन्न देशो के बीच पूंजी का निवेश आसानी से हो सके      

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