मुद्रा अवस्फीति या मुद्रा संकुचन (Deflation)

 Resolution Ias By Er Neelesh Tomar

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मुद्रा अवस्फीति या मुद्रा संकुचन (Deflation)

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वस्तुओं की कीमत का लगातार गिरना या दूसरे शब्दों में वस्तु की तुलना में मुद्रा के मूल्य का बड़ना Deflation सदैव हानिकारक होता है। एक बार यदि कीमतों का गिरना शुरू हुआ और लगातार यह बना रहा तो अर्थव्यवस्था अंनत:मंदी की स्तिथि में भी जा सकती है। 

मुद्रा अवस्फीति के कारण 

इसके मुख्य जिम्मेदार कारक है। बाजार में पैसे की उपलब्धता का कम हो जाना जिसके कारण लोगों की खरीद क्षमता कम हो जाती है। और इससे मांग कम हो जाती है। 

बाजार में मुद्रा की कमी कई कारणों से हो सकती है। जैसे 

  • मौद्रिक नीति को कठोर बना दिया जाये 
  • सरकार के द्वारा प्रत्यक्ष कर के दर को बड़ा दिया जाये 
  • सरकार के द्वारा अपने खर्च को घटा दिया जाये 
  • सरकार के द्वारा बाजार का पैसा ऋण के रूप में ले लिया जाये 
इसके साथ कभी-कभी अतिरिक्त उत्पादन हो जाने की स्थिति में वस्तुओं की अधिक आपूर्ति हो जाने से भी कीमते घटने लगती है। 

उपाय 
  • मौद्रिक नीति को सस्ता कर दिया जाये 
  • लोगों को अधिक से अधिक रोजगार देने का प्रयास किया जाये इसके लिए सरकार को अपना खर्च बढ़ाना चाहिये 
  • प्रत्यक्ष कर को घटा देना चाहिए 
  • घाटे से निपटने से उधोगो की मदद करने के उद्देश्य से कुछ प्रोत्साहन पैकेज दिया जाना चाहिए  

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