राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

Resolution Ias By Er Neelesh Tomar

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग 

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संसद द्वारा एक कानून के अंतगर्त गठित मानवाधिकार आयोग 28 सितम्बर 1993 से प्रभावी हुआ। यह एक सांविधिक (न कि संवैधानिक) निकाय है। मानवधिकार आयोग में राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायलय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को अध्यक्ष बनाया जाता है। मानवाधिकार को संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं है। मानवधिकार आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है जिसमें एक अध्यक्ष व चार सदस्य होते है।
  •  आयोग का अध्यक्ष भारत का कोई सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश होना चाहिए 
  • एक सदस्य उच्चतम न्यायालय में कार्यरत अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश 
  • एक सदस्य उच्च न्यायालय   का कार्यरत या सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश होना चाहिए 
  • शेष दो सदस्य जिन्हे मानवाधिकारों के संबंध में विशेष ज्ञान हो 
आयोग का कार्यालय दिल्ली में स्थित है। 
आयोग का कार्य वस्तुत:सलाहकारी होता है। आयोग उललंघन के दोषी को दंड देने का अधिकार नहीं रखता न ही अयोय पीड़ित को किसी प्रकार की सहायता दे सकता है। आयोग की सिफारिशों संबंधित सरकार पर बाध्य नहीं है परन्तु उसकी सलाह पर की गई कार्यवाही पर उसे आयोग को एक महीने से भीतर सूचित करना होता है। यू.एन.ओ.द्वारा 10 दिसम्बर 1948 के संकल्प के अनुसार मानवधिकार दिवस 10 दिसम्बर को मनाया जाता है। संविधान के मूलअधिकार में भी मानवाधिकार की भावना निहित है। 
  • वर्तमान में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रमुख एच. एल. दत्तू है। 
  • आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष होता है। 

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