राज्य के नीति निर्देशक तत्व

 Resolution Ias By Er Neelesh Tomar

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राज्य के नीति निर्देशक तत्व 

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नीति निर्देशक तत्व राज्य के लिए संविधान के द्वारा दिए गए कुछ ऐसे दिशा निर्देश है। जिन निर्देशों का पालन राज्य से करने की अपेक्षा की गई है। यह निर्देश सामाजिक आर्थिक न्याय को सुनिश्चित करने के लिए है मूल अधिकार जहाँ व्यक्तिगत हित को सुरक्षित करने से संबंधित है। वही नीति निर्देशक तत्व सामूहिक हित करने से संबंधित है। नीति निर्देशक तत्व न्यायलय के द्वारा प्रस्तुत नहीं कराये जा सकते यह राज्य के बिरुद मिले अधिकार नहीं है किन्तु राज्य के पालन करने योग्य दिशा निर्देश है। 

नीति निदेशक तत्व भाग -4 (अनु० 36 -51)

  • डॉ० अम्बेडकर ने भी माना था कि - सामाजिक आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना के बिना आजादी एवं राजनैतिक लोकतंत्र का कोई महत्व नहीं इसी भावना  ध्यान में रखते हुए संविधान सभा ने लोक कल्याणकारी राज्य के निर्माण हेतु संविधान के भाग - 4 में अनु० 36 -51 के मध्य आयरलैंड से प्रेरित होकर नीति निदेशक तत्वों को शामिल किया गया 
  • मिनर्वा मिल्स मामले 1980 में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों के संतुलन पर जोर देते हुए यह कहा कि निदेशक तत्वों को लागू करने हेतु संसद मूल अधिकारो में संशोधन कर सकती है। 
अनु० 36 -राज्य की परिभाषा दी गई है। 
अनु० 37 - के अनुसार नीति निदेशक तत्व न्यायलय के द्वारा लागू नहीं कराये जा सकते 
अनु० 38- जन कल्याण के लिए सामाजिक व्यवस्था 
अनु ०39 - राज्य के लिए कुछ अनुक्रमणीय तत्व रखे गए है जैसे 
अनु० 39 (a)- स्त्री पुरुष दोनों को रोजगार के समान अवसर मिले 
अनु० 39 (b)- देश के संसाधनों का नियंत्रण इस प्रकार हो कि सामूहिक हित सुरक्षित हो सके 
अनु० 39 (c)- अर्थव्यवस्था का संचालन इस प्रकार हो कि उत्पादन के साधनो का कुछ ही लोगो के हाथो में संकेन्द्रण न हो 
अनु० 39 (d)- स्त्री और पुरुषो दोनों को समान कार्य के लिए समान बेतन मिले 
अनु० 39 (e)- राज्य ऐसा प्रयास करेगा कि किसी व्यक्ति को मजबूरी में किसी ऐसे कार्य को न करना पड़े जिससे उसके स्वास्थ और शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े 
अनु० 39 (A)- 42 वे संविधान संसोधन द्वारा जोड़ा गया राज्य कमजोर वर्गों को निशुल्क विधि साहयता दिलाने का प्रयास कराएगा ताकि कोई व्यक्ति अपनी गरीबी के कारण न्याय पाने से वंचित न रहे 
अनु० 40 - ग्राम पंचायतो का गठन 
अनु० 41 - इसके अनुसार राज्य सभी व्यक्तियों को काम और शिक्षा देने का प्रयास करेगा तथा अपनी क्षमता के अनुसार बेगारी ,बुढ़ापा और बीमारी की स्थिति में कुछ सरकारी साहयता देने का प्रयास करेगा 
अनु० 42 - काम की न्याय संगत और मानवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबन्ध 
अनु० 43 - कर्मकारो  लिए निर्वाचन मजदूरी एवं कुटीर उधोग को प्रोत्साहन मनरेगा योजना इसी अनु० से प्रेरित है 
अनु० 44 - नागरिको के लिए एक समान सिविल संहिता 
अनु० 45 - राज्य 0 से 6 साल तक के बच्चो को शिक्षा प्रदान करने का प्रयास करेगी 
अनु० 46 - राज्य अनुसूचित जातियों ,जनजातियों अन्य पिछड़ा वर्ग को शिक्षा देने उनके आर्थिक हितो को बढ़ावा देने तथा अन्याय एवं शोषण से बचाने के लिए रक्षा करेगा 
अनु० 47 - राज्य सभी लोगों के पोषाहार और जीवनस्तर को ऊपर उठाने का प्रयास करेगी और इस संबंध  मादक पदार्थो और स्वास्थ के लिए हानिकारक ओषधियो पर रोक लगा सकता है। 
अनु० 48 - कृषि एवं पशुपालन का संगठन 
अनु० 48 (A)- पर्यावरण संरक्षण और वन्य जीवो की रक्षा 
अनु० 49 - राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों ,स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण 
अनु० 50 - कार्यपालिका एवं न्यायपालिका का पृथक्करण 
अनु० 51 - अंतरराष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा की अभिवृद्धि  



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