Resolution Ias By Er Neelesh Tomar
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बजट तथा सरकार के विभिन्न घाटे
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सरकार की आय व्यय का विवरण बजट कहलाता है। बजट में विगत वर्ष के आय और व्यय के अनुमानों का वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत किया जाता है। भारतीय संविधान के अनु० 112 में बजट निर्माण के बारे में बताया गया है
प्राप्तियां - सरकार की प्राप्तियां दो प्रकार की होती है।
- राजस्व प्राप्तियां
- पूँजीगत प्राप्तियां
- कर राजस्व प्राप्ति
- गैर कर राजस्व प्राप्ति
ये प्राप्तियां विभिन्न प्रकार के करो के माध्यम से होती है।
गैर कर राजस्व प्राप्तियां
ये प्राप्तियां सरकारी कंपनियों द्वारा की गई कमाई अथवा सरकारी बैंक ,बीमा,रेल आदि से की गई कमाई होती है।
पूंजीगत प्राप्तिया- यह प्राप्तियां भी दो प्रकार की होती है य-
- ऋण पूंजीगत प्राप्तियां
- गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियां
ऋण पूंजीगत प्राप्तियों में भारत सरकार द्वारा लिया गया ऋण शामिल किया जाता है।
गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियां
गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियों में सरकारी सम्पत्तियो की बिक्री या सरकारी ऋणों की बसूली से प्राप्त धन इसमें शामिल किया जाता है।
सरकार के व्यय
ये भी दो प्रकार के होते है।
- राजस्व व्यय
- पूंजीगत व्यय
यह खर्च सरकार के सामान्य कामकाज में होने वाले खर्च होते है या फिर ऐसे मतो में होने वाले खर्च होते है जिनसे किसी लाभकारी सम्पत्ति का सृजन नहीं होता है। जैसे कर्मचारियों के वेतन के खर्च ,सेना पर खर्च ,ब्याज भुगतान पर खर्च आदि
पूंजीगत व्यय
ऐसी मतो पर होने बाले खर्च होते है। जिनसे स्थाई सम्पत्ति का सृजन होता है भविष्य लिए लाभकारी होते है। जैसे किसी कंपनी का निर्माण ,स्थाई भवन का निर्माण या बिजली प्लांट का निर्माण
सरकार के घाटे
1 ) बजटीय घाटा - यह सरकार की कुल प्राप्तियों और कुल व्यय का अंतर होता है।
2 ) राजस्व घाटा - सरकार की राजस्व प्राप्तियां और राजस्व व्यय के बीच के अंतर को राजस्व घाटा कहते है।
राजस्व घाटा = राजस्व प्राप्ति - राजस्व व्यय
3 ) राजकोषीय घाटा - सरकार को अपने कुल खर्चो को पूरा करने के लिए जितना पैसा ऋण लेना पड़ता है। वही सरकार का राजकोषीय घाटा होता है।
राजकोषीय घाटा = राजस्व प्राप्ति + गैर ऋण पूंजीगत प्राप्ति - कुल व्यय
प्राथमिक घाटा
राजकोषीय घाटा में से ब्याज अदायी पर खर्च होने वाले धन को घटा दिया जाये वही प्राथमिक घाटा होता है
प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा - ब्याज अदायी
- राजकोषीय घाटा सबसे बड़ा घाटा होता है। इसके बाद राजस्व घाटा और बाद में प्राथमिक घाटा
- बजट में ब्याज अदायी सरकार की सबसे बड़ी मद है
यदि हमारा निर्यात कम है और आयात अधिक है तो ऐसी स्थिति में व्यापार में हमको घाटा होता है जिसे चालू खाते का घाटा कहते है।चालू खाते का घाटा राजकोषीय घाटे को और अधिक बढ़ाता है।
जुड़बा घाटा
यदि एक साथ अर्थव्यवस्था में राजकोषीय घाटा और चालू खाते का घाटा भी हो तो ऐसी स्थिति को जुड़बा घाटा कहते है।
ऋण जाल
यदि किसी देश को अपने ऋण और ब्याज को चुकाने के लिए ऋण लेना पड़े तो इसे ऋण जाल कहते है बढ़ता हुआ राजकोषीय घाटा किसी देश को अनन्ता: ऋण जाल की स्थिति में फंसा सकता है इस स्थिति में किसी बाहरी साहयक की जरूरत पड़ती है।


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