रुपये का अवमूल्यन एवं रुपये की परवर्तनीयता

 Resolution Ias By Er Neelesh Tomar

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रुपये का अवमूल्यन एवं रुपये की परवर्तनीयता

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रुपये का अवमूल्यन 

अपने देश की मुद्रा का मूल्य जानबूझ कर दूसरे देश की तुलना में कम कर देना इसे ही मुद्रा का अवमूल्यन कहा जाता है। 

  • मुद्रा का अवमूल्यन करने से निर्यात में वृद्धि होती है और आयात घटता है 
  • भारत में अब तक तीन बार वर्ष 1949 ,1966 तथा 1991 में मुद्रा का अवमूल्यन किया गया था 
  • यदि बाजारिक दशाओं के कारण मुद्रा के मूल्य में लगातार कमी हो रही है तो इसे मूल्य ह्रास कहते है 

रुपये की परिवर्तनीयता 


यदि किसी देश की मुद्रा अन्य देशो की मुद्रा के साथ स्वतंत्र रूप  से बदली जा सकती हो तो इसे ही रुपये की परिवर्तनीयता कहा जाता है। 
भारतीय रूपया चालू खाते पर पूर्ण परवर्तनीय है किन्तु पूंजी खाते पर पूर्ण परिवर्तनीय नहीं है 
  • पूंजी खाता परिवर्तनीयता का मतलब यह है कि यदि कोई निवेशक विदेशो में कोई संपत्ति खरीदना चाहता है तो उसको अपनी सरकार से उसके रुपये को विदेशी मुद्रा में परवर्तित कर देती है तो वह विदेश में संपत्ति खरीद सकता है अन्यथा नहीं 
  • पूंजी खाते पर रुपये की पूर्ण परिवर्तनीयता पर सुझाव देने हेतु सरकार ने तारापोर समिति का गठन किया था 
  • चालू खाते पर रुपये को 1994 से परवर्तनीय बनाया गया 

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