Resolution Ias By Er Neelesh Tomar
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1991की ओधोगिक नीति क्या थी
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इसमें 1948 और 1956 की ओधोगिक नीतियों में व्यापक परिवर्तन किया गया 1990 तक भारत में 1956 की ओधोगिक नीति को ही आधार बनाया गया था इसमें अधिकांश उधोगो को सरकारी क्षेत्र के लिए आरक्षित रखा गया था इसके अलावा अन्य कई उधोगो को अनिवार्य लाइसेंस के आधीन रखा गया था बड़े उधोग के विस्तार पर रोक लगाने के लिए MRTP Act 1969 का उपयोग किया गया था। 1991 की उधोग नीति में सरकार के लिए आरक्षित उधोगो की संख्या हटा दी गई वर्तमान में तीन उधोग आरक्षित है परमाणु ऊर्जा एवं परमाणु ऊर्जा और रेलवे इसी प्रकार अनिवार्य लाइसेंस के आधीन आने वाले उधोगो की संख्या भी कम कर दी गई वर्तमान में ऐलकोहल ,तम्बाकू उत्पाद ,विस्फोटक पदार्थ ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जिसका उपयोग हथियारों में होता है तथा खतरनाक रसायन आदि लाइसेंस के आधीन है। इसी के बाद भारत में औधोगिकरण ,निजीकरण ,वैश्वीकरण (LPG) का दौर शुरू हुआ इससे पूर्व भारत की अर्थव्यवस्था एक बंद अर्थव्यवस्था के रूप में थी। आर्थिक क्षेत्र में लगाए गए विभिन्न प्रकार के नियंत्रण को हटा लेने की प्रकिया को ही उदारीकरण कहा गया सरकार ने सरकारी कंपनियों से अपनी हिस्सेदारी को धीरे - धीरे कम करना शुरू कर दिया इसे ही विनिवेश कहा गया यह विनिवेश जब 51 % से ज्यादा हो जाता है तो उस कम्पनी के प्रबंधन पर निजी क्षेत्र का नियंत्रण हो जाता है और उसी को निजीकरण कहा जाता है। उदारीकरण और निजीकरण की इस प्रकिया के साथ हमारी अर्थव्यवस्था विश्व की अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ जुड़ गई इसे ही वैश्वीकरण कहा गया। MRTP Act को समाप्त कर दिया गया इसकी जगह भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की स्थापना की गई जो बाजार में विभिन्न कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने का कार्य करेगा सरकारी उपक्रमों में सुधार के लिए आगे चलकर सरकार ने नवरत्न और मिनीरत्न नाम से कंपनियो का वर्गीकरण किया नवरत्न 1997 में सरकार की 9 बड़ी कम्पनिया थी जो अधिक लाभ दे रही थी इन कम्पनियो को निर्णय लेने के मामले में अधिक छूट दिया गया शेष कंपनियों के लिए यह शर्त रख दी गई यह कंपनिया अच्छा काम करेगी तो उनको भी नवरत्न का दर्जा दे दिया जायेगा और निर्णय लेने में अधिक छूट दिया जायेगा धीरे -धीरे नवरत्न कंपनियों की संख्या बढ़ती गई 2009 आते -आते इनकी संख्या 21 हो गई थी इन्ही कंपनियों में से कुछ कंपनियों को महारत्न का दर्जा दे दिया गया यह ऐसी कम्पनिया थी जिनका लाभ औसत 5 हजार करोड़ से ज्यादा था जिनका औसत कार्यवार 25 हजार करोड़ से ज्यादा था जिनका नेटवर्थ 15 हजार करोड़ था।
वर्तमान में महारत्न कंपनियों की संख्या 10 है
महारत्न कंपनियों के नाम
- भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड
- भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड
- कोल इंडिया लिमिटेड
- गेल इंडिया लिमिटेड
- हिंदुस्तान पेट्रोलियम कोर्पोरेशन लिमिटेड
- एनटीपीसी लिमिटेड
- इंडियन ऑयल कोर्पोरेशन लिमिटेड
- तेल और प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड
- पावर ग्रिड कोर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड
- स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड
- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड
- कंटेनर कोर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड
- इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड
- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड
- महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड
- नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड
- NBCC इंडिया लिमिटेड
- NMDC लिमिटेड
- NLC इंडिया लिमिटेड
- ऑयल इंडिया लिमिटेड
- पॉवर फाइनेंस कोर्पोरेशन लिमिटेड
- राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड
- ग्रामीण विधुतीकरण निगम लिमिटेड
- शिपिंग कोर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड


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