Resolution Ias By Er Neelesh Tomar
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बेरोजगारी तथा बेरोजगारी के प्रकार
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जब एक व्यक्ति सक्रियता से रोजगार की तलाश करता है लेकिन वह काम पाने में असफल रहता है तो इस अवस्था को बेरोजगारी कहा जाता है। भारत में बेरोजगारी से संबंधित आकड़े NSSO जारी करता है।
बेरोजगारी के प्रकार
(1) प्रच्छन्न बेरोजगारी - यह बेरोजगारी समान्तया कृषि के क्षेत्र में अधिक पायी जाती है इसमें बाहर से देखने में किसी काम में लगे हुए सभी रोजगार दिखायी देते है किन्तु वास्तविकता यह होती है उनमे कुछ लोग ऐसे होते है जिनकी उत्पादकता शून्य होती है अर्थात उन लोगों को उस काम से हटा दिया जाये तो अंतिम उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ेगा ऐसे लोगों को ही प्रच्छन्न बेरोजगार या न दिखायी देने वाले बेरोजगार कहा जाता है।
(2) मौसमी बेरोजगारी - यदि किसी व्यक्ति को एक बिशेष मौसम में काम मिलता है और बाकी समय में काम नहीं मिलता है तो ऐसी बेरोजगारी को मौसमी बेरोजगारी कहा जाता है यह बेरोजगारी सामान्तया कृषि या कृषि से जुड़े उधोगो में पायी जाती है।
(3) घर्षणात्मक बेरोजगारी - यह बेरोजगारी उस स्थिति में होती है जब एक व्यक्ति एक काम को छोड़ कर दूसरे काम की तलाश में घूमता रहता है यह बेरोजगारी किसी अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार की स्थिति होने के बाबजूद हो सकती है ऐसा किसी कारण से हो सकता है जैसे व्यक्ति स्वंय कार्य छोड़ दे या किसी परिस्थिति में बदलाव के कारण काम छोड़ दे जैसे कोई विवाद हो या उस कंपनी के तकनीकी में कुछ परिवर्तन हो जाये
(4) संरचनात्मक बेरोजगारी - किसी देश में संरचना अर्थात आधारभूत ढांचे की कमी ,पूंजीगत वस्तुओं तथा संसाधनों की कमी अथवा उपलब्ध अवसर के अनुरूप योग्यता की कमी के कारण जो बेरोजगारी फैलती है उसे संरचनात्मक बेरोजगारी कहा जाता है। भारत में सबसे अधिक बेरोजगारी संरचनात्मक बेरोजगारी है।
(5) चक्रीय बेरोजगारी - यह बेरोजगारी सामान्तया बिकसित देशो में (बाजार आधारित अर्थव्यवस्था) में पायी जाती है क्यों कि बाजार में माँग की दशा में परिवर्तन होता रहता है जब मांग बढ़ती है तो रोजगार मिलता है जब माँग कम हो जाती है तो बेरोजगारी बड़ जाती है और यह क्रम चलता रहता है इस लिए इसे चक्रीय बेरोजगारी कहते है
(6) शिक्षित बेरोजगारी - यदि किसी व्यक्ति को अपनी शिक्षा और योग्यता के अनुरूप काम न मिले तो ऐसी स्थिति को शिक्षत बेरोजगारी कहते है।
भारत में सर्वाधिक रोजगार कृषि के क्षेत्र में मिलता है लगभग 58 % लोग अभी भी रोजगार के लिए कृषि पर निर्भर है।


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