ज्वालामुखी क्या है



                                        Resolution ias By Er Neelesh Tomar

ज्वालामुखी  क्या है 

पृथ्वी तल पर होने वाले आकस्मिक प्राकृतिक घटनाओं में ज्वालामुखी प्रमुख है। 
ज्वालामुखी भूपटल पर एक गोल छिद्र या दरार वाला खुला भाग होता है। इससे होकर पृथ्वी के अत्यंत तप्त भूगर्भ से गैसें,तरल मेग्मा ,जल ,चट्टानों के टुकड़े ,राख ,धुआँ निकलता है। जिस छिद्र से उपरोक्त पदार्थ निकलते है उसे ज्वालामुख या क्रेटर कहते है। और सारी प्रकिया को ज्वालामुखी कहा जाता है। 

Note -पृथ्वी का आंतरिक भाग गर्म है। इस गर्मी के तीन कारण बताये जाते है। 
  • पृथ्वी के बनने के समय से ही आंतरिक भाग गर्म है। 
  • पृथ्वी के अंदर रेडियोधर्मी पदार्थो के `टूटते रहने के कारण गर्मी बढ़ती रहती है। 
  • पृथ्वी की बाहरी परतो के दबाब के कारण भी आंतरिक भाग गर्म है। 
वैज्ञानिको के अनुसार भू -पर्पटी अनेक टुकड़ो में विभाजित है। इन टुकड़ो को प्लेट कहते है। आंतरिक गर्मी के कारण ये प्लेट खिसकती रहती है। पृथ्वी पर ज्वालामुखी एवं भूकम्प होने का कारण इन प्लेटो का खिसकना है। प्लेटों के खिसकने से भू -पटल कमजोर हो जाता है और पृथ्वी के अंदर से मेग्मा ,चट्टान के टुकड़े ,राख आदि पदार्थ ऊपर आ जाते है। इन्हे हम ज्वालामुखी के उद्गार कहते है। 

ज्वालामुखी के प्रकार 
        ज्वालामुखी का उदभेदन नियमित रूप से नहीं होता। कभी होता है ,कभी नहीं होता। इसलिए इसे तीन भागो में विभाजित किया जाता है। 

(1 ) सक्रिय ज्वालामुखी -जिन ज्वालामुखी से एक बार उदभेदन होने के बाद निरन्तर समय -समय पर उदभेदन होते रहते है,उन्हें सक्रिय ज्वालामुखी कहते है। इटली के एटना तथा स्ट्राम्बोली ज्वालामुखी इसके उदाहरण है। 

(2 ) प्रसुप्त ज्वालामुखी -ये वे ज्वालामुखी है जिनसे कई बार उदभेदन के बाद उदभेदन की समस्त क्रियाएँ कुछ समय के लिए बन्द हो जाती है। किन्तु अकस्मात पुन:उदभेदन हो जाता है। इन्हे प्रसुप्त ज्वालामुखी कहते है। इटली का विसुवियस ज्वालामुखी इसका उदाहरण है। 

(3 ) विसुप्त या शान्त ज्वालामुखी -जिन ज्वालामुखी में एक बार उदभेदन होने के बाद लम्बे समय तक उदभेदन नहीं होता तथा पुन:उदभेदन की संभावना भी नही होती ऐसे ज्वालामुखी विसुप्त या शान्त ज्वालामुखी कहलाते है अफ्रीका का किलीमंजारो पर्वत इसका उदाहरण है। 


सर्वाधिक ज्वालामुखी प्रशान्त महासागर के चारो और तटीय भागों तथा महादीपीय क्षेत्रों में पाये जाते है। इसलिए इस पेटी को अग्निवलय कहा जाता है। 


ज्वालामुखी का मानव जीवन पर प्रभाव 
         
        ज्वालामुखी से विभिन्न स्थलाकृतियों की रचना होती है ,जैसे मैदान ,पठार ,पर्वत आदि इनसे हमें बहुमूल्य खनिज पदार्थो की प्राप्ति होती है। ज्वालामुखी से निकला लावा चारो और फैलकर कालान्तर में उपजाऊ मिट्टी का निर्माण करता है। शान्त ज्वालामुखी के मुख में वर्षा का जल भरने से झीलो का निर्माण होता है। ज्वालामुखी से कई लाभ के साथ-साथ हानियाँ भी होती है। ज्वालामुखी उद्गार से मानव ,जीवजन्तु ,वनस्पति,कृषि क्षेत्र मानव आवास एवं बड़े -बड़े नगर ,गाँव जलकर नष्ट हो जाते है अथवा दबकर ध्वस्त हो जाते है। 

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