Resolution Ias By Er Neelesh Tomar
9 अगस्त 1925 काकोरी कांड की पूरी कहानी
9 अगस्त 1925 को आज के ही दिन को जब रेलगाड़ी से सरकारी खजाना सहारनपुर से लखनऊ की ओर जा रहा था तो इसे काकोरी नामक स्टेशन पर लूट लिया गया इसे ही काकोरी कांड कहा गया। सरकारी खजाना लूटने का विचार राम प्रसाद बिस्मिल का था। इसमें राम प्रसाद बिस्मिल,राजेंद्र लाहिड़ी ,रोशन सिंह एवं अशफाकउल्ला खां को दिसंबर 1927 में फांसी दे दी गयी एवं शचीन्द्र सान्याल को आजीवन कारावास की सजा मिली। मन्मथनाथ गुप्त को 14 वर्ष की कैद हुई
काकोरी कांड ,मुकदमा और फांसी
काकोरी कांड का मकसद सिर्फ अंग्रेजो के सरकारी खजाने को लूटना था और उन्हें एक कड़ा संदेश पहुंचना था इसके बाद जब अधिकतर लोग पकडे गए तो दस महीने तक मुकदमा अदालत में चला और फांसी तक की नौबत आ गयी
17 दिसंबर 1927 को राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को गोंडा में 19 दिसंबर को रामप्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर,अशफाक उल्ला खां को फैजाबाद ,रोशन सिंह को इलाहबाद की जेल में फांसी दे दी गयी
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने जब असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था तब एक नई पीढ़ी को काफी झटका लगा था क्यों कि बड़ी उम्मीद के साथ देश में एक बड़ी संख्या में लोग इस आंदोलन के साथ जुड़ गये थे इसी के साथ एक नई घटना की नींव पड़ी जिसे इतिहास में काकोरी कांड के नाम से जाना जाता है इस घटना ने अंग्रेजो को बड़ा परेशान किया और एक एक संदेश पंहुचा दिया कि हिन्दुस्तानी क्रांतिकारी उनसे लोहा लेने के लिए हर तरह के तरीके अपना सकते है
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