Resolution Ias By Er Neelesh Tomar
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सहकारी बैंक( को -ऑपरेटिव बैंक ) एवं भूमि विकास बैंक
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सहकारी बैंको की स्थापना अलग -अलग राज्यों में अलग -अलग कानूनों के तहत की गई है इनकी संरचना त्रिस्तरीय होती है सबसे ऊपर राज्य सहकारी बैंक उसके नीचे जिला सहकारी बैंक सबसे नीचे प्राथमिक ऋण समितिया होती है राज्य सहकारी बैंक ही सीधे RBI से लोन लेने का अधिकार होता है। जिला सहकारी बैंक को ही केन्द्रीय बैंक कहा जाता है इसको ऋण राज्य सहकारी बैंक से मिलता है और इसके द्वारा प्राथमिक ऋण समितियों को ऋण दिया जाता है सहकारी बैंको पर RBI का नियंत्रण आंशिक रूप से ही होता है इनको अपने द्वारा दिए गए ऋण का 60 %कृषि के लिए देंगे और शेष लघु उधोग और कुटीर उधोगो के लिए देंगे
- सहकारी बैंक का आशय उन छोटे वित्तीय संस्थानों से है जो शहरी और गैर शहरी दोनों क्षेत्रों में छोटे व्यवसायों को ऋण की सुविधा देते है।
- सहकारी बैंको का मुख्य उद्देश्य अधिक लाभ कमाना नहीं होता बल्कि अपने सदस्यों को सर्वोत्तम सेवाएं देना होता है।
भूमि विकास बैंक (LDB )
यह बैंक किसानो को दीर्घकालीन अवश्यकतायो की पूर्ती के लिए लम्बे समय के लिए लोन देते है इसके लिए भूमि से संबंधित कागज गिरवी रखे जाते है यह लोन जमीन खरीदने ,जमीन पर कोई स्थायी सुधार करने ,ट्रैक्टर खरीदने के लिए दिया जाता है।
- भूमि विकास बैंक का प्रारम्भ मद्रास से हुआ


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