कोहिनूर हीरे का संक्षिप्त इतिहास

 Resolution Ias By Er Neelesh Tomar

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कोहिनूर हीरे का संक्षिप्त इतिहास 

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सर्वप्रथम यह गोलकुण्डा के खान (आधुनिक आंध्र प्रदेश ) से एक श्रमिक को मिला जिसने इसे तेलंगाना के शासक प्रतापरुद्रदेव को दिया प्रतापरुद्रदेव ने मलिक  काफूर एवं मलिक काफूर ने इसे अलाउद्दीन खिलजी को दिया सिकंदर लोदी के समय यह हीरा आगरा आ गया। पानीपत के प्रथम युद्ध के समय ग्वालियर के राजा विक्रम जीत सिंह ने आगरा पर आक्रमण करके इसे अपने पास रख लिया। हुमायुं के ग्वालियर आक्रमण के समय यह हीरा उसे मिला। उस समय कोहिनूर हीरे का वजन 320 रत्ती था इसके मूल्य से सारे संसार का ढाई दिन का भोजन चल सकता है। हुमायुं के बाद यह हीरा मुग़ल शासको के राजमुकुट की शोभा बढ़ाता रहा। 1739 में नादिरशाह ने इसे  मु.शाह रंगीला से लूट लिया। बाद में नादिरशाह ने इसे अहमदशाह अब्दाली को दिया। अब्दाली के बाद शाहशुजा को प्राप्त हुआ अफगानिस्तान के शासक शाहशुजा ने इसे रणजीत सिंह को भेट किया। रणजीत सिंह के बाद यह दिलीप सिंह के पास आया। गुजरात के युद्ध में डलहौजी ने दिलीप सिंह को हराकर यह हीरा ब्रिटेन की रानी को भेट क्र दिया। यह आज भी ब्रिटेन की रानी की शोभा बढ़ा रहा है एवं बर्किघन पैलेस में सुरक्षित है एवं इसे भारत लाने का प्रयास कर रहा है।  



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