Resolution Ias By Er Neelesh Tomar
प्लासी का युद्ध
अलीनगर की सन्धि द्वारा अंग्रेजो को बंगाल में अनेक सुविधाएँ मिल गयी थी तथापि वे समस्त बंगाल पर अधिकार करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने तैयारियाँ प्रारंभ कर दी। क्लाइव ने फ़्रांसिसी बस्ती चन्द्र नगर पर अधिकार कर लिया और नवाब कुछ नहीं कर सका। नवाब के दुश्मनों को क्लाइव ने अपनी सुरक्षा में ले लिया। क्लाइव ने सेनापति मीरजाफर ,राय दुर्लभ ,जगत सेठ एवं अमीरचन्द के साथ एक गुप्त सम्झौता कर लिया जिसके अनुसार सिराजुद्दोला को हटाकर मीरजाफर को बंगाल का नवाब बनाया जाना था। षड्यंत्र की रचना के बाद युद्ध का बहाना खोजा जाने लगा। नवाब पर अलीनगर की सन्धि भंग करने का आरोप लगाया गया। आरोप लगाते ही क्लाइव सेना सहित मुर्शिदाबाद के लिए चल पड़ा
23 जून 1757 ई. को क्लाइव तथा नवाब की सेनाओं के बीच प्लासी के मैदान में युद्ध हुआ। नवाब के सेनापति मीरजाफर ,राय दुर्लभ तथा यारलतीफ खां चुपचाप युद्ध का नजारा देखते रहे। नवाब पराजित हुआ और उसे मीरजाफर के पुत्र मीरन ने मार डाला।
सैनिक दृष्टि से प्लासी के युद्ध का कोई महत्व नहीं था ,मगर राजनीतिक एवं आर्थिक दृष्टि से इस युद्ध का अत्यधिक महत्व है। बंगाल का नया नवाब मीरजाफर अंग्रेजो के हाथों की कठपुतली बनकर रह गया। बंगाल के राजनीतिक जीवन पर अंग्रेजों का ही अधिकार था। आर्थिक दृष्टि से प्लासी युद्ध के बाद बंगाल की लूट आरंभ हो गयी मीरजाफर ने लगभग 3 करोड़ रुपए अंग्रेजो को दिए। बंगाल ,बिहार एवं उड़ीसा में कर मुक्त व्यापार का अधिकार मिला कम्पनी को कलकत्ता के समीप 24 परगना की जमींदारी मिली। कलकत्ता में कंपनी को सिक्के ढालने का अधिकार मिला। इस प्रकार प्लासी के युद्ध ने कम्पनी को बंगाल की सत्ता सौंप दी।
दोस्तों अगर पोस्ट पसंद आयी हो तो कमेंट करके जरूर बताये साथ ही अपना सुझाव कमेंट बॉक्स में अवश्य दे

0 Comments